Tuesday, May 25, 2010

"जन्मदिवस"

हल्दी की पोटली फिर से हाथ देते हो
मृत्यु की राह पर जीवन को साध देते हो.
सिर्फ एक तारीख बढ़ने भर से ,
जीवन की सीमायें माप लेते हो.

जीवन की ढलती सांझ पर
पल भर मैं कैसा समां बाँध लेते हो.
साँसों  की घटती उम्र को ,
क्यूँ "जन्मदिवस" का नाम देते हो ?

               --  नरेन्द्र पन्त 
                    मई , २०१०    

2 comments:

Udan Tashtari said...

सच कहा...मगर है तो ऐसा ही!

दिलीप said...

ab kya karein do pal ki khushi manate hain varna waqt kahan hai...achcha hi hai na...