Monday, May 10, 2010

"माँ" - dedicated to my Mom

साजिश हो कोई , मेरा सहारा है तू
आदि है तू , जीवन की धारा है तू .
आह एक मेरी और वो आंसू तेरा , फिर
तेरी मीठी लोरी , और आँचल का बसेरा .
रात भर  सिरहाने बैठ तू मुझको ताकती
जाने कितनी रातें ना सोयी तू जागती .

थिरकते , उन्मुक्त बचपन को तूने संवारा ,
पुचकारा कभी , कभी लिया डांट  का सहारा.
तुझे कैसे बताऊँ तेरा दुलारा है जो ,
आँखों का तेरी नन्हा तारा है जो
मीलो दूर बैठा है जो  जागता ,
पल पल तेरे आँचल की छाँव मांगता .

सपने में  तेरी मधुर आवाज है गूंजती ,
दोनों हथेलियाँ जुड़कर , माँ तुझे हैं पूजती.
माँगा नहीं कभी वो वरदान है तू
ममता की मूरत है , "माँ" भगवान् है तू .

    ---- नरेन्द्र पन्त
          9 मई  , २०१०

1 comments:

सुनील दत्त said...

सपने में तेरी मधुर आवाज है गूंजती ,
दोनों हथेलियाँ जुड़कर , माँ तुझे हैं पूजती

आओ हम सब मां की सेबा का प्रण और पक्का करें