Tuesday, August 23, 2011

टोपी

"आज घर से विश्वविद्यालय तक बहुत सी सफेद टोपियां और बहुत से सिर दिखे । बहुत शरीफ लोग भी थे उनमें शामिल जो सफेद टोपी पहने हुवे थे । तब से निर्णय नहीं कर पा रहा हूँ मैं भ्रष्ट कौन से रंग की टोपी पहनूँ । आप मदद करे़ कृपया ।                                                                                                                      -- श्री सुशील कुमार जोशी
 हायं ,क्या टोपी पहनना वाकई में जरूरी है ? न ही मौसम बदहाल है, जो उससे बचने की ठानो . वैसे ही इतने प्रदूषण से बालो को दमे की शिकायत है, कृपया गला न घोंटे और अगर फैशन के लिए जरूरी समझते हैं तो व्यर्थ मालूम होता है. सभी ने पहनी है ,क्या खाक फैशन ( आजकलक मैसन के फैशनक अत्ति ख़याल छ ). हाँ कोई धार्मिक पहलू है तो जरुर पहनिए , आजकल उपरवाला कुछ खफा मालूम होता .सर पर डंडे की मार थोड़ी कम पीडादायिनी प्रतीत होगी.  कृपया टोपी का प्रयोग (मौलिक और चारित्रिक ) गंजेपन तक सीमित रखें. 

-- नरेन्द्र पन्त  
२३ अगस्त ,२०११



Tuesday, August 16, 2011

"मेरी देशभक्ति"

स्व तंत्र व्यभिचारी  हुआ 
स्वार्थ  के सायों  में,
पुत गए मन कालिख से 
बटवारे की आहों में.
                         
मुझे सिखा दिया गया लिखना
इन काले अक्षरों में,
कोशिश लिखने की बहुत की 
पर कोई पढ़ नहीं  पाता.
                            
और ये,
बरसी उसी पुताई की
सालाना ताने देती मुझको, 
मैं ढोंग करता कुछ पल देशभक्ति का
और बलवा  होने छोड़ देता उसे, फिर एक साल तक.

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नरेन्द्र पन्त 
१५ अगस्त ,२०११