Tuesday, January 24, 2012

"अनकही बातें , अधूरे ख्वाब"

१:
लिखा पढ़ी के चक्कर में 
जो लग गयी हाथ स्याही 
रंग डाली किस्मत 
अब फेर कर पानी
कौन (सा) रंग खोजू मैं .
क्यूँ  बूझूं अगला कारनामा क्या रंग होगा ?

२: 
तू उस पहाड़ी पर , मैं नदी के इस किनारे चीखता ,
चलो पतंग उड़ायें 
हम न मिलें,
डोर को तो मिलने दो .
कट जाएगी? क्या?
यही इश्क है
नहीं तो , 
क्यूँ दुनिया कटी पतंग के पीछे भागती देखी?

३:

वो दुबकी , उस झाड के पीछे 
मेरे हाथ में लगे कांटो में 
इन्द्रधनुषी रंग खोजती ,
कुछ दिन पहले का वाकया है 
जाने कौन से कोने में जा छुपी,
अब किताब के पन्ने  भी पीले 
और सुबह की धूप भी 
अब और लहू में कितने रंग मिलाऊं
वो सफ़ेद रंग कहाँ से लाऊं?

( मेरे प्यारे खरगोश daisy  की याद में . मिस यू  daisy  ) 



-- नरेन्द्र पन्त
( जनवरी २०१२)

2 comments:

Yatin said...

Bahut khub pantji... :)

preeja said...

Wow too good my friend you are really really talented . V much proud to have a buddy like u