Friday, March 9, 2012

रंग

रुक और ताने दे
गिरह में बाँध ले तिनके सुनहले
यूँ तोड़ ले ,जो जोड़ने की गुत्थी सुलझती नहीं,
मुख मोड़ ले उस दाग से जो हैं रंगीले
रंग गिन इन बादलों के,
चुनरी को रंगने के बाद
और पोत दे इस आसमाँ  को
बेरंग इस मन की तरह.
सबसे रंगीला छजता है ,जो ,
छिड़क दे वो रंग ,इस आसमाँ को
चादर बना .  

-- नरेन्द्र पन्त 
  

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