Tuesday, April 17, 2012

"अटल"

नहीं व्यर्थ, विश्वास अटल ,
फेरे में आज ,चकित क्यूँ कल,
सुलगा दी माटी , भाग लिखा 
आजन्म सवांरा मेरा कल.

तोड़ रहे , बन आज अतिथि,
जीवन वट से दिन की पाती,
और सुखाते खुद ही उसको
गीली घास न पाए जल.

अगनित पल ले लो, जोड़ घटा लो ,
यत्न करो, सच ना झूठे,
गर विदा हुए तुम ,जग अनाथ हो ,
और धूमिल ये आते कल.

जिस जिस पल मैं थम जाऊं
रहूँ मैं माया में व्याकुल
एक पोखरन मुझे बनाना
कर देना विस्फोट "अटल"

-- नरेन्द्र पन्त

4 comments:

PRAKHAR MITTAL said...

Such an amazing post... Nice tribute to Atal ji

Ragini said...

fabulous work!!! hope d inspiration gets to read it smhow..

monadic said...

very nice creation.. i am amazed..keep it up..

narendra pant said...

thnx dosto ,, padhne ke liye .. maine bhi jabardasti padhwa hi di :P