Wednesday, July 21, 2021

निगाह

तेरी निगाहों के जवाबों में , अपने सवालों को ढूंढता रहता,
सुकून ना रास आए , तेरे बावलों को ढूंढता रहता,
ढूंढता फिर उसी मकान को जहां तू रोशन है,
मैं धड़कनों  में दिल , तुझे खयालों में  ढूंढता रहता।

Sunday, October 27, 2019

खाकी


कुछ और वक़्त बाकी था , वो एक साथी था ,
कुछ और कहने को, अब कुछ ना बाकी था ।
कर्तव्य पथ पर जान की, होली जली या दीवाली,
ओढ़ा जो तुमने शान से ,  रंग वो "खाकी" था।

उतार ना पाएगी ,तेरा एहसान रह गया बाकी,
तुम्हारे बलिदान से, सदियों सलामत रहे " खाकी " ।

सदियों सलामत रहे " खाकी "

🙏 नमन,  साथियों को जो आज हमारे बीच नहीं है ।  ये दीपक आपके नाम।

--
नरेंद्र पंत
27-अक्टूबर - 2019 

Sunday, September 22, 2019

Devdaar

उम्र देवदार की आंखो में आंखे डाल , दिल मिट्टी के खिलौनों की ख्वाहिश में ,
सूख जाएंगे तेरे ग़म के आंसू , आ भीग मेरे संग कभी बारिश में ।

Friday, September 20, 2019

ये साल

तू उम्मीद सी बढ़ रही , पल पल इस साल में,
जादू बस तेरा चलता , अपने  इस हाल में ।
ना मिले तो दिन अरसा सा बीते है,
हाय ये रात बीते जाने किस सवाल में ।

दिल से जीत लेंगे  , नई ये जंगे भी,
लूट लेंगे दौड़कर, कटी पतंगे भी,
साल एक और बढ़ा , उम्र के खज़ाने में,
सदियों सा फासला, तेरे आने और जाने में ।

एक दिन और चढ़ा और चढ़ी उमंगे भी ,
तुम कहो तो मैं कुछ कहूं।
धड़कने कुछ कह रही , चुपचाप सुन लेना,
तुम कहो तो मैं चुप रहूं ।

             - नरेंद्र पंत
           20/9/2019


Monday, August 5, 2019

वृक्ष

सांसे छोड़ता , यूहीं सरेराह तू दिख गया ,
जंगल से बिछड़ा, भरे बाज़ार में बिक गया ।

कहीं फिर तू, किवाड़ों में जकड़ा हुआ ,
कहीं है तू, रिवाज़ो में जलता हुआ,
कहीं तू डूबा हुआ, स्याही  में रात दिन
कहीं तू नाव बन , समंदर में उड़ता हुआ ।
कहीं तू तस्वीर को, हाथो से थामकर,
वक़्त को कैद कर , खड़ा अकड़ा हुआ।

और  मेरा एक शौक , तेरा घर जला गया
तपा कर कुनबे को , राख में मिला गया ।
तेरी ये कहानी लेकिन जानता कौन है,
सब कुछ सहते हुए ,
शोर भरे संसार में , वृक्ष तू मौन है ।

Thursday, May 2, 2019

Bridge

I held your hand and it was cold,
I felt the warmth when words were told.
right over the river that keeps us apart,
O' old bridge , you have my heart.

You sway with the river when you get old,
You hold the countless stories ,untold ,
You count my steps , you are a piece of art,
when there are  too many , you fall apart

you stand still we come and go,
you are Full metal, from head to toe,
But you have a heart which melts all day,
Wonder , if you get a voice , what will you say.

--
NP / 2019 , 1 May

Sunday, February 24, 2019

peace : Pulwama and hootch tragedy

When the winter was bitter and cold,
When the roses were being sold,
You added the poison in the ale,
You bombed our soldiers into a tale.

O' man, mortal engines of hate
Stop bloodshed clean the slate,
Why not let the peace remain
Why not build the nations again.
 
-- Narendra Pant 
   Feb 2019