हल्दी की पोटली फिर से हाथ देते हो
मृत्यु की राह पर जीवन को साध देते हो.
सिर्फ एक तारीख बढ़ने भर से ,
जीवन की सीमायें माप लेते हो.
जीवन की ढलती सांझ पर
पल भर मैं कैसा समां बाँध लेते हो.
साँसों की घटती उम्र को ,
क्यूँ "जन्मदिवस" का नाम देते हो ?
-- नरेन्द्र पन्त
मई , २०१०