रुक और ताने दे
गिरह में बाँध ले तिनके सुनहले
यूँ तोड़ ले ,जो जोड़ने की गुत्थी सुलझती नहीं,
मुख मोड़ ले उस दाग से जो हैं रंगीले
रंग गिन इन बादलों के,
चुनरी को रंगने के बाद
और पोत दे इस आसमाँ को
बेरंग इस मन की तरह.
सबसे रंगीला छजता है ,जो ,
छिड़क दे वो रंग ,इस आसमाँ को
चादर बना .
-- नरेन्द्र पन्त
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