न कर इश्क पर बनने दे ऊन को गोला ,
इक स्वेटर में बुन जायेंगे ,
तू दिल के पास रहना ,मैं हाथ के किनारे
कभी किसी दिन, कोई गलती तो होगी हाथ से
जब मैं पोंछ लूँगा तेरे तन पर पड़े वो छींटे.
या चबा लेगा दांतों तले मुझे वो नन्हा
फिर कितनी जोर से धड़का ये दिल ,
जब मालूम होगा, तू इश्क को खुदा मानेगी.
-- नरेन्द्र पन्त
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