साजिश हो कोई , मेरा सहारा है तू
आदि है तू , जीवन की धारा है तू .
आह एक मेरी और वो आंसू तेरा , फिर
तेरी मीठी लोरी , और आँचल का बसेरा .
रात भर सिरहाने बैठ तू मुझको ताकती
जाने कितनी रातें ना सोयी तू जागती .
थिरकते , उन्मुक्त बचपन को तूने संवारा ,
पुचकारा कभी , कभी लिया डांट का सहारा.
तुझे कैसे बताऊँ तेरा दुलारा है जो ,
आँखों का तेरी नन्हा तारा है जो
मीलो दूर बैठा है जो जागता ,
पल पल तेरे आँचल की छाँव मांगता .
सपने में तेरी मधुर आवाज है गूंजती ,
दोनों हथेलियाँ जुड़कर , माँ तुझे हैं पूजती.
माँगा नहीं कभी वो वरदान है तू
ममता की मूरत है , "माँ" भगवान् है तू .
---- नरेन्द्र पन्त
9 मई , २०१०
Monday, May 10, 2010
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1 comments:
सपने में तेरी मधुर आवाज है गूंजती ,
दोनों हथेलियाँ जुड़कर , माँ तुझे हैं पूजती
आओ हम सब मां की सेबा का प्रण और पक्का करें
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