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Wednesday, August 15, 2012

"माँ तुझे सलाम"

माँ आज तुझे सलाम , कल करूँगा नीलाम,
सह लेगी अगले बरस की सलामी तक?
बदले आज़ादी के मायने , बचपन के लड्डू  से,
व्यंग में झुलसी जवानी तक.
कब तक भरम को गहराऊँ, साँसों को फुसलाऊ
तिरंगे की इस दो  दिनी रवानी पर.
बरसो इस नाव को खेकर,लहू के कई रंग लेकर
लो आ पहुंचे
उस गुलामी से इस गुलामी तक.
माँ , सह लेगी अगले बरस की सलामी तक ?

-- नरेन्द्र पन्त
15 अगस्त , 2012