कहाँ छिपी धड़कन ,टटोलू कलाई किसकी
कहाँ छुपा वो तन ?
जो बादलो के आईने में ,
खुद को उकेरता , और बरस जाता ,
दोपहर की धूल भरी आंधी के बाद .
जिसकी आखिरी सांस का स्वर गूंजता ,
गरजती इस बदली को , मात देता .
सबक गीता का , पढ़ लिया , गुन लिया
पर व्यर्थ बुझ जाता क्यूँ , ये ज्ञान का तारा
जब सांस का दीपक , विदा करता लौ को
पतंगे के परों पर बिठा.
अनजान नगर या मायके को ?
रीत के विपरीत है ,क्षण भर विस्मित हूँ ,
और व्याकुल भी , उत्सुक भी कि
बादल फिर घिर आये हैं.
पतंगे के पर निकल आये या नहीं ?
-- नरेन्द्र पन्त
कहाँ छुपा वो तन ?
जो बादलो के आईने में ,
खुद को उकेरता , और बरस जाता ,
दोपहर की धूल भरी आंधी के बाद .
जिसकी आखिरी सांस का स्वर गूंजता ,
गरजती इस बदली को , मात देता .
सबक गीता का , पढ़ लिया , गुन लिया
पर व्यर्थ बुझ जाता क्यूँ , ये ज्ञान का तारा
जब सांस का दीपक , विदा करता लौ को
पतंगे के परों पर बिठा.
अनजान नगर या मायके को ?
रीत के विपरीत है ,क्षण भर विस्मित हूँ ,
और व्याकुल भी , उत्सुक भी कि
बादल फिर घिर आये हैं.
पतंगे के पर निकल आये या नहीं ?
-- नरेन्द्र पन्त