संघर्ष पथ पर चल रहा हूँ , हारा नहीं हूँ मैं .
अजान बातो में ,मैं जानता हूँ खो रहा ,
भाग के विपरीत चलता , जागता और सो रहा .
ध्येय के प्रवाह में , हूँ मैं जी रहा
पर राह के पत्थर , क्यूँ अंगोछे में सी रहा ?
सफ़ेद काले बादलों को शाम तक मैं ताकता
ऊँचाई का भेद कर उन्हें वर्गों में बांटता
प्रश्नों के व्यापार में ,हूँ उत्तर को बूझता
अपनी ही जीत में ,हूँ हार से जूझता .
हूँ अज्ञान और विज्ञान के बीच की कोई कड़ी
समय की सीमा है , और बची हैं बस दो घडी
डूबा हुआ हूँ धैर्य में , बुझा तारा नहीं हूं मैं
निराश रोते बादलों , तुम्हारा नहीं हूँ मैं ,
संघर्ष पथ पर चल रहा हूँ , हारा नहीं हूँ मैं .
-- नरेन्द्र पन्त
२९ अप्रैल , २०१०
7 comments:
निराश रोते बादलों , तुम्हारा नहीं हूँ मैं ,
संघर्ष पथ पर चल रहा हूँ , हारा नहीं हूँ मैं .
-बहुत उम्दा!! क्या बात है..
आज के दुःख भरे जीवन, मानवीय सोच ,संवेदनाओं और संघर्ष से उपजे विचारों को एक कविता के रूप में श्रेष्ठ प्रस्तुती के लिए धन्यवाद / आज नैतिकता और मानवता को बचाने के लिए एकजुट होने की जरूरत है / आशा है आप इसी तरह ब्लॉग की सार्थकता को बढ़ाने का काम आगे भी ,अपनी अच्छी सोच के साथ करते रहेंगे / ब्लॉग हम सब के सार्थक सोच और ईमानदारी भरे प्रयास से ही एक सशक्त सामानांतर मिडिया के रूप में स्थापित हो सकता है और इस देश को भ्रष्ट और लूटेरों से बचा सकता है /आशा है आप अपनी ओर से इसके लिए हर संभव प्रयास जरूर करेंगे /हम आपको अपने इस पोस्ट http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/04/blog-post_16.html पर देश हित में १०० शब्दों में अपने बहुमूल्य विचार और सुझाव रखने के लिए आमंत्रित करते हैं / उम्दा विचारों को हमने सम्मानित करने की व्यवस्था भी कर रखा है / पिछले हफ्ते अजित गुप्ता जी उम्दा विचारों के लिए सम्मानित की गयी हैं /
sundar
Chalna hi jindagi hai.............. Nirasha ke kshanon mein aasha ke lau jagati aapki rachna bahut achhi lagi..
Bahut shubhkamnayne..
धन्यवाद , आशा करता हूँ कि आप भविष्य में भी मेरी लेखनी का मार्गदर्शन करते रहेंगे..
अति उत्तम एवं प्रेरणादायी
बहुत सुन्दर और प्रेरणादायी भावाभिव्यक्ति....!
कुंवर जी,
Post a Comment